कार्यक्रम के दौरान डॉ. सुमन सुराना ने विद्यार्थियों को यातायात नियमों की जानकारी केवल सैद्धांतिक रूप से ही नहीं, बल्कि **व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) तरीके से** भी समझाई। उन्होंने बच्चों को बताया कि सड़क पर चलते समय ट्रैफिक सिग्नल, ज़ेब्रा क्रॉसिंग, फुटपाथ तथा यातायात संकेतों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने बच्चों को सड़क पार करने का सही तरीका भी सिखाया तथा बताया कि **लाल बत्ती (Red Light)** पर रुकना और सुरक्षित संकेत मिलने के बाद ही सड़क पार करना चाहिए।



इस अवसर पर विद्यार्थियों से **यातायात नियमों पर सुंदर चित्र (ड्रॉइंग)** बनवाए गए तथा रंगों के माध्यम से ट्रैफिक संकेतों और सड़क सुरक्षा के विभिन्न नियमों को सरल एवं रोचक ढंग से समझाया गया। बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए सड़क सुरक्षा से जुड़े आकर्षक चित्र बनाए।





कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों को **सड़क सुरक्षा शपथ** दिलाई गई। बच्चों ने संकल्प लिया कि वे सदैव यातायात नियमों का पालन करेंगे, सड़क पार करते समय पहले ट्रैफिक सिग्नल का ध्यान रखेंगे, जल्दबाजी नहीं करेंगे तथा पैदल चलते समय हमेशा **फुटपाथ** का उपयोग करेंगे और दूसरों को भी यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करेंगे।


डॉ. सुमन सुराना ने कहा कि **"यातायात नियम केवल कानून नहीं, बल्कि हमारे जीवन की सुरक्षा का आधार हैं। यदि बचपन से ही बच्चों में सड़क सुरक्षा की सही आदतें विकसित की जाएँ, तो भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।"**


कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका **श्रीमती मंजू चंगरानी**, शिक्षिका **श्रीमती रूपाली जैन**, **श्री अंशुल खंडेलवाल**, विद्यालय के अन्य शिक्षकगण तथा हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन की स्वयंसेविकाएँ एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे। सभी ने संस्था द्वारा चलाए जा रहे इस जनजागरूकता अभियान की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए अत्यंत उपयोगी पहल बताया।


हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन द्वारा भविष्य में भी गोद लिए गए सभी राजकीय विद्यालयों में सड़क सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं नैतिक शिक्षा से जुड़े ऐसे जागरूकता कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि बच्चों में जिम्मेदार नागरिक बनने के संस्कार विकसित हो सकें।